(१) घटनाओं और विषयों से संबंधित समाचार:
भारत में केंद्र सरकार ने पुराने लेबर लॉ को हटाकर चार नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे स्वतंत्र भारत में मजदूरों के लिए सबसे बड़े और प्रगतिशील सुधारों में से एक बताया है, जिससे कामगारों को सशक्त बनाने, कम्प्लायंस आसान बनाने और ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ बढ़ाने का दावा किया गया है। वहीं कई मजदूर संगठन और विपक्ष इसे मजदूर विरोधी और उद्योगपतियों के हित में बताते हुए विरोध जता रहे हैं। मजदूर संगठन जैसे इंटक, एटक, एचएमएस, सीआईटीयू आदि ने देशभर में प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। नए लेबर कोड में कोड ऑन वेज, ऑक्यूपेशनल सेफ़्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड, कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी और इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि इससे न्यूनतम मजदूरी, समय पर वेतन, समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं की गारंटी मिलेगी।
(२) घटनाओं और विषयों के कारण:
सरकार का दावा है कि 29 पुराने कानूनों को चार नए कोड में समेकित कर मजदूरों के हित में सुधार किया गया है, ताकि सभी श्रमिकों को लाभ मिल सके। पिछले कानूनों में कई कमियाँ थीं, जैसे सीमित सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम वेतन का अनुपालन न होना और नौकरी सुरक्षा का अभाव। वहीं मजदूर संगठनों का आरोप है कि सरकार ने बिना व्यापक चर्चा के ये कोड पास कराए और इसमें मजदूरों के हक़ और हड़ताल की स्वतंत्रता कम कर दी गई है। विरोध का कारण यह भी है कि नए कोड से मालिकों के लिए फैक्ट्री बंद करना आसान होगा, काम के घंटे बढ़ सकते हैं और गिग वर्कर्स, ठेकेदार और महिलाओं के अधिकारों पर खतरा हो सकता है। इसके अलावा 50 करोड़ कामगारों में से अधिकांश असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जिन्हें कोड पूरी तरह सुरक्षित नहीं कर पा सकता।
(३) घटनाओं और विषयों से सीखे जाने वाले सबक:
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि श्रम सुधारों में संतुलन बनाना आवश्यक है। केवल उद्योगपतियों के हित या केवल कामगारों के हित को ध्यान में रखकर कानून बनाए जाने पर विरोध और असंतोष बढ़ सकता है। कानून लागू करने से पहले व्यापक चर्चा, पारदर्शिता और सामाजिक संवाद महत्वपूर्ण हैं। मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार की गारंटी सुनिश्चित करने के साथ-साथ आर्थिक विकास और ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ के लक्ष्यों को भी संतुलित रखना आवश्यक है। इसके अलावा गिग वर्कर्स, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक और महिलाओं के अधिकारों पर विशेष ध्यान देना सीखने योग्य सबक है।













