विपक्ष ईवीएम में धांधली की बात कहता है, फिर चुनाव भी लड़ता है – प्रशांत किशोर

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(१) घटनाओं और विषयों से संबंधित समाचार :-

बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर बड़े दावों के साथ उतरे थे और सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे, लेकिन पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। परिणामों में एनडीए ने 202 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया। चुनाव से पहले ही जन सुराज को झटके लगने लगे थे—कई उम्मीदवारों ने नामांकन वापस ले लिया, जिसके बाद हालात उनके लिए चुनौतीपूर्ण होते गए। चुनाव के बाद अपने इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने स्वीकार किया कि उनकी पार्टी चुनावी सफलता हासिल नहीं कर सकी और 5% वोट भी प्राप्त नहीं कर पाई। हालांकि उनका कहना है कि चुनाव अभियान के दौरान रोज़गार, पलायन और स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता मिलने में उनकी भूमिका रही।


(२) घटनाओं और विषयों के कारण :-

प्रशांत किशोर ने अपनी हार के पीछे कई कारण बताए—उनके अनुसार बिहार में जेडीयू-बीजेपी और आरजेडी-कांग्रेस के बीच बने वोट-ट्रांसफर के पुराने समीकरण को उनकी पार्टी तोड़ नहीं पाई। महिलाओं को चुनाव से पहले नकद राशि और योजनाओं के लाभ मिलने से भी वोटिंग पैटर्न प्रभावित हुआ, जिससे जन सुराज को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। पार्टी की संगठनात्मक कमजोरी, नए राजनीतिक ढांचे का अनुभव, और तनख़्वाह पाने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर निर्भरता को भी हार का कारण बताया गया। कई लोग बाहर से वोट देने आए, लेकिन अंतिम समय पर एनडीए की जीत की संभावना देखकर उनका वोट जन सुराज से खिसक गया। साथ ही, बिहार में वर्षों से चल रही जातिगत राजनीति और स्थापित दलों की पकड़ के कारण नए विकल्प के लिए पर्याप्त भरोसा नहीं बन पाया।


(३) घटनाओं और विषयों से सीखे जाने वाले सबक :-

इस चुनाव ने यह स्पष्ट किया कि केवल अभियान, यात्राएँ और बड़े दावे चुनाव जीतने के लिए पर्याप्त नहीं होते— मज़बूत संगठन, जमीनी स्तर पर भरोसा और लगातार काम करने की लंबी रणनीति ज़रूरी है। यह भी सीख मिलती है कि नई राजनीतिक पार्टियों के लिए स्थापित ध्रुवीकरण, लोकलुभावन योजनाएँ, और सरकारी तंत्र का प्रभाव बड़ी चुनौती बन सकते हैं। प्रशांत किशोर की स्वीकारोक्ति यह दर्शाती है कि चुनावी राजनीति में आत्ममंथन, गलतियों को स्वीकार करना और आगे की रणनीति सुधारना बेहद महत्वपूर्ण है। लोकतंत्र में सफलता केवल जीत से नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, मुद्दों को केंद्र में लाने और दीर्घकालिक प्रयास से मापी जाती है।

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