ज्वालामुखी की राख कितनी ख़तरनाक है, भारत में कई हवाई उड़ानें प्रभावित

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(१). घटनाओं और विषयों से संबंधित समाचार :-

इथियोपिया के हायली गुब्बी ज्वालामुखी के फटने से कई किलोमीटर ऊपर तक राख के विशाल बादल बने हैं, जिनका असर भारत तक दिखाई दे रहा है। राख का गुबार लाल सागर को पार कर मध्य पूर्व और मध्य एशिया की ओर बढ़ रहा है। चूंकि ये बादल बहुत अधिक ऊंचाई पर हैं—उसी स्तर पर जहाँ अधिकांश उड़ानें संचालित होती हैं—इसका सीधा प्रभाव विमानन क्षेत्र पर पड़ा है। भारत में कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानें देरी से चल रही हैं, कुछ रद्द की गई हैं और कई उड़ानों के मार्ग बदले गए हैं।


(२). घटनाओं और विषयों के कारण :-

ज्वालामुखी विस्फोट के बाद राख समुद्र तल से लगभग 8.5 किलोमीटर से 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर फैल गई है। यही वह ऊंचाई है जहाँ सामान्यत: यात्री विमान उड़ते हैं, इसलिए उड़ान संचालन सबसे अधिक प्रभावित हुआ। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के प्रमुख मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि यह राख सैटेलाइट के कामकाज और उड़ान संचालन को अस्थायी रूप से प्रभावित कर सकती है, लेकिन इसका जमीन के मौसम या वायु गुणवत्ता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। राख की यह परत सोमवार रात उत्तर भारत तक पहुँची और अब चीन की ओर बढ़ रही है। जोखिम के कारण डीजीसीए ने एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित क्षेत्रों से बचने की कोशिश करें।


(३). घटनाओं और विषयों से सीखे जाने वाले सबक :-

यह घटना दिखाती है कि प्राकृतिक आपदाएँ—विशेषकर ज्वालामुखी विस्फोट—वैश्विक स्तर पर परिवहन और तकनीकी प्रणालियों को प्रभावित कर सकती हैं। इससे यह शिक्षा मिलती है कि विमानन सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक निगरानी, समय पर चेतावनी प्रणाली और लचीली उड़ान योजना अत्यंत आवश्यक है। यह भी समझ आता है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग, मौसम संबंधी सतर्कता और त्वरित निर्णय विमानों और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। साथ ही, हमें यह स्वीकार करना होगा कि प्रकृति की अप्रत्याशित घटनाओं के सामने आधुनिक तकनीक भी सीमित हो सकती है, इसलिए तैयारियों और सावधानियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

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