‘उन्हें डर था टारगेट पूरा नहीं कर पाएंगे तो सस्पेंड हो जाएंगे’, एमपी में सात बीएलओ की मौत

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(१). घटनाओं और विषयों से संबंधित समाचार :-
मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (एसआईआर) अभियान के दौरान बूथ-स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) पर बढ़ते काम के बोझ ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। अब तक रायसेन, दमोह, बालाघाट, कटनी और सीधी ज़िलों में कम से कम सात बीएलओ की मौत हो चुकी है, कई बीमार हैं और एक बीएलओ लापता है। बीएलओ के परिवारों का कहना है कि अत्यधिक काम, रात–रात भर ड्यूटी, लगातार ऑनलाइन मीटिंग और टारगेट न पूरा करने की आशंका ने अधिकारियों पर भारी मानसिक और शारीरिक दबाव बनाया। कई बीएलओ को हृदयाघात हुआ, कुछ ने आत्महत्या की और कई अस्पताल में भर्ती हैं। प्रशासन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक मौतों को एसआईआर से न जोड़ने की बात कही है और परिजनों को सहायता देने का आश्वासन दिया है।


(२). घटनाओं और विषयों के कारण :-
बीएलओ की मौतों और गंभीर स्थिति के पीछे मुख्य कारण लगातार बढ़ता कार्यभार, तकनीकी खामियां, फील्ड में घर-घर जाकर फॉर्म भरने का दबाव और अस्थिर डिजिटल एप्लिकेशन बताए जा रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि बीएलओ को लक्ष्य से पीछे रहने पर निलंबन जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की चेतावनी दी जा रही थी, जिससे मानसिक तनाव बढ़ा। नेटवर्क समस्याएं, रात देर तक चलने वाली ऑनलाइन मीटिंग, बार-बार फील्ड विज़िट और मतदाताओं के न मिलने से काम और कठिन हो गया। कुछ मौतें दुर्घटना या बीमारी से जुड़ी बताई गई हैं, लेकिन परिवार इन्हें काम के अत्यधिक दबाव से संबंधित मान रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि यह संबंध स्पष्ट करने के लिए मेडिकल रिपोर्ट आवश्यक है।


(३). घटनाओं और विषयों से सीखे जाने वाले सबक :-
यह घटना दिखाती है कि किसी भी बड़े सरकारी अभियान में जमीनी कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कार्य-परिस्थितियों को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। काम का बोझ यथासंभव संतुलित हो, तकनीकी साधन स्थिर और भरोसेमंद हों, तथा कर्मचारियों को पर्याप्त विश्राम और समय मिलना चाहिए। अधिकारियों को टारगेट-आधारित दबाव कम करके सहयोगात्मक कार्य वातावरण बनाना चाहिए। सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बड़े स्तर पर लागू होने वाले अभियान शुरू करने से पहले कर्मचारियों के प्रशिक्षण, डिजिटल सुविधाओं, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और शिकायत निवारण तंत्र को मज़बूत किया जाए। इससे भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं से बचा जा सकेगा और कर्मचारी सुरक्षित एवं सम्मानजनक माहौल में काम कर सकेंगे।

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