संसद का शीतकालीन सत्र: जगदीप धनखड़ का ज़िक्र कर क्या बोले मल्लिकार्जुन खड़गे

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१. घटनाओं और विषयों से संबंधित समाचार:

संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा। पहले दिन लोकसभा में विपक्ष के हंगामे और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) पर चर्चा की मांग के कारण कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सदस्य वेल में नारे लगाने लगे, जिसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने कार्यवाही दोपहर 12 बजे और फिर दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी। वहीं, राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए सभापति सीपी राधाकृष्णन का स्वागत किया। सत्र में कुल 15 बैठकें होंगी और सरकार 13 महत्वपूर्ण बिल पेश करने की योजना बना रही है।


२. घटनाओं और विषयों के कारण:

लोकसभा में हंगामे के पीछे विपक्ष की एसआईआर पर आपत्ति और सरकार की नीतियों पर असंतोष प्रमुख कारण हैं। विपक्ष विशेष रूप से बीएलओ की मौत, उनके बढ़ते काम के दबाव, दिल्ली के लाल किले के पास कार बम धमाका, नेशनल हेराल्ड केस, बढ़ते प्रदूषण, नए लेबर लॉ और चुनावी मुद्दों पर चर्चा करना चाहता है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का मानना है कि सरकार संसद के शीतकालीन सत्र को सीमित करके चर्चा को प्रभावित कर रही है और लोकतंत्र तथा संसदीय परंपराओं को खतरे में डाल रही है। इसके अलावा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, हेल्थ सिक्योरिटी और नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल 2025 पेश किए, जिससे विधायी कार्यसूची भी गहन रही।


३. घटनाओं और विषयों से सीखे जाने वाले सबक:

इस समाचार से यह शिक्षा मिलती है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में पारदर्शिता, बहस और सभी दलों की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। संसद में सुचारू कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए सभी पक्षों को शांति और अनुशासन बनाए रखना चाहिए। इसके अलावा, विधायी प्रक्रियाओं और महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर चर्चा के बिना देश की नीति और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। विपक्ष और सरकार दोनों को जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए ताकि लोकतंत्र और संसदीय मर्यादा बनी रहे और जनता के हितों की रक्षा हो।

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