सस्‍ता होने वाला है! रेपो रेट में इतनी कटौती कर सकता है RBI, पढ़ें HSBC की रिसर्च रिपोर्ट

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१. घटनाओं और विषयों से संबंधित समाचार:

केंद्रीय बैंक RBI इसी हफ्ते, 3 से 5 दिसंबर तक, मॉनिटरी पॉलिसी की बैठक करने वाला है। बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 दिसंबर को जानकारी देंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि RBI रेपो रेट में कटौती कर सकता है, जिससे रेपो रेट लिंक्ड लोन सस्ता हो सकता है। HSBC ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च का भी यही अनुमान है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) का फैसला 5 दिसंबर को आएगा।


२. घटनाओं और विषयों के कारण:

भारत में विकास दर अभी तक मजबूत बनी हुई है। सरकारी खर्च और GST कट के कारण रिटेल खर्च में वृद्धि हुई है। नवंबर फ्लैश मैन्युफैक्चरिंग PMI 56.6 से संकेत मिलता है कि GST के प्रभाव से उत्पादन में वृद्धि अपने पीक पर पहुंच गई है। चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8.2% रही, जो जून तिमाही के 7.8% और अनुमानित 7.5% से अधिक है। ग्रॉस वैल्यू एडेड वृद्धि दर 8.1% और नॉमिनल जीडीपी 8.7% रही। विकास दर तेज होने के पीछे जीएसटी दरों में कटौती और उपभोक्ता मांग में वृद्धि जैसे कारक प्रमुख हैं।


३. घटनाओं और विषयों से सीखे जाने वाले सबक:

इस रिपोर्ट से यह शिक्षा मिलती है कि आर्थिक नीतियां, जैसे GST कटौती और सरकारी खर्च में वृद्धि, देश की विकास दर और उत्पादन को सीधे प्रभावित करती हैं। इसके अलावा, मौद्रिक नीति के माध्यम से RBI की दरों में बदलाव से ऋण की लागत और निवेश पर असर पड़ता है। निर्यात और घरेलू मांग में संतुलन बनाए रखना भी विकास की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि डेटा और रिसर्च के आधार पर आर्थिक नीतियों का निर्णय देश की आर्थिक वृद्धि और वित्तीय स्थिरता के लिए अहम होता है।

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