छिंदवाड़ा के जानलेवा सिरप की कहां तक पहुंची जांच? केंद्रीय मंत्री ने संसद में दी जानकारी

0
2

१. घटनाओं और विषयों से संबंधित समाचार:

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कुछ महीनों पहले कई बच्चों की मौत कफ सिरप के सेवन के कारण हुई थी। इसके बाद राजस्थान में भी इसी सिरप से बच्चों की मौत की घटनाएँ सामने आईं, जिससे मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया। जांच में पता चला कि बच्चों द्वारा ली गई कफ सिरप Coldrif में Diethylene Glycol (DEG) की खतरनाक मात्रा पाई गई थी। यह सिरप तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित M/s Sresan Pharmaceuticals द्वारा बनाया गया था। केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्य सभा में जानकारी दी कि बच्चों द्वारा खाए गए 19 दवाइयों में से 4 दवाएं खराब गुणवत्ता वाली पाई गईं।


२. घटनाओं और विषयों के कारण:

जांच से पता चला कि कंपनी के प्लांट में कई गंभीर खामियाँ थीं और GMP (Good Manufacturing Practices) का उल्लंघन हुआ था। स्टोरेज की स्थिति बेहद खराब थी, जिससे दवाओं में दूषित सामग्री मिलने का खतरा बढ़ गया। केंद्रीय और राज्य सरकारों ने मिलकर विशेषज्ञ टीम भेजी, जिसमें महामारी विशेषज्ञ, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, एनटोमोलॉजिस्ट और ड्रग इंस्पेक्टर शामिल थे। टीम ने छिंदवाड़ा और नागपुर में जाकर सभी सैंपल की जांच की और राज्य सरकार के साथ मिलकर तथ्य दर्ज किए। कंपनी के खिलाफ तमिलनाडु सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द कर दिया और सभी संबंधित राज्यों में बिक्री रोक और रिकॉल आदेश जारी किया गया।


३. घटनाओं और विषयों से सीखे जाने वाले सबक:

इस घटना से यह स्पष्ट हुआ कि दवाइयों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर निरंतर निगरानी आवश्यक है। बच्चों की जान बचाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए और नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए। अब भारत में हर सिरप के बाज़ार में भेजने से पहले DEG और Ethylene Glycol की टेस्टिंग अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा, देशभर में 700 से अधिक कफ सिरप कंपनियों का ऑडिट किया जा रहा है और घटिया या नकली दवाओं पर कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसे जानलेवा हादसे रोके जा सकें।

LEAVE A REPLY