5 शहर, 400 फ्लाइट कैंसल, 12 घंटों तक इंतजार, आखिर कौन सी आफत आई जो आसमान में उड़ते विमान जमीन पर खड़े

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१. घटनाओं और विषयों से संबंधित समाचार:

भारत के कई बड़े शहरों—दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, अहमदाबाद और बेंगलुरु—के हवाई अड्डों पर भारी अव्यवस्था फैल गई है क्योंकि इंडिगो एयरलाइंस की करीब 400 से अधिक उड़ानें तीन दिनों में रद्द कर दी गई हैं। केवल बेंगलुरु में 73, हैदराबाद में 33 और दिल्ली से 30 उड़ानें रद्द हुईं, जिससे हजारों यात्री 12–14 घंटे तक फंसे रहे। कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें बार-बार केवल “1–2 घंटे इंतजार करें” जैसा जवाब मिलता रहा, जबकि उड़ानें लगातार रद्द होती रहीं। 2 दिसंबर को इंडिगो की केवल 35% उड़ानें समय पर चलीं और 3 दिसंबर को यह गिरकर 20% रह गई। देशभर में लगभग हर प्रमुख एयरपोर्ट पर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों सहित हजारों यात्री बेबस होकर इंतजार करते दिखे। DGCA के अनुसार, नवंबर महीने में अकेले इंडिगो की 1,232 उड़ानें रद्द हुईं। लगातार cancellations ने एयरपोर्ट पर अफरातफरी बढ़ा दी है, और DGCA ने मामले का संज्ञान लेते हुए इंडिगो से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है।


२. घटनाओं और विषयों के कारण:

इंडिगो ने इस व्यापक उड़ान संकट का मुख्य कारण क्रू की कमी, नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियम, बढ़ा हुआ यात्री भार, खराब मौसम, तकनीकी दिक्कतें और एयर ट्रैफिक कंजेशन को बताया है। नए FDTL नियम पायलटों और क्रू को अधिक आराम देने हेतु बनाए गए हैं, लेकिन इससे उपलब्ध क्रू की संख्या अचानक कम पड़ गई, जिसके कारण कई उड़ानें बिना केबिन क्रू या पायलट के समय पर रवाना नहीं हो सकीं। एयरपोर्ट अधिकारियों ने बताया कि कई उड़ानें केवल इसलिए रद्द करनी पड़ीं क्योंकि केबिन क्रू उपलब्ध नहीं था। दिल्ली एयरपोर्ट पर बैगेज मैसेजिंग सिस्टम खराब होना भी अव्यवस्था की एक वजह रहा। भारत में वर्ष का यह सबसे ज्यादा यात्रियों वाला समय है और अकेले इंडिगो का घरेलू बाजार में 60% से अधिक हिस्सा है; इसलिए जब उसकी 65% उड़ानें एक ही दिन प्रभावित होती हैं, तो इसका असर पूरे देश की उड़ानों पर “रिपल इफेक्ट” की तरह फैल जाता है। DGCA ने इंडिगो को क्रू प्लानिंग सुधारने, एटीसी व एयरपोर्ट समन्वय बढ़ाने और संचालन प्रक्रियाएँ बेहतर करने के निर्देश दिए हैं।


३. घटनाओं और विषयों से सीखे जाने वाले सबक:

यह घटना यह दर्शाती है कि बड़े स्तर पर एयरलाइन संचालन में क्रू प्रबंधन, रोस्टरिंग, तकनीकी तैयारी और आपातकालीन बैकअप सिस्टम कितने महत्वपूर्ण होते हैं। एक ही एयरलाइन की गड़बड़ी से देशभर में उथल-पुथल हो जाना बताता है कि भारतीय एविएशन सेक्टर में ईकोसिस्टम-निर्भरता, पर्याप्त वैकल्पिक क्षमता, और संकट प्रबंधन तंत्र अभी भी कमजोर हैं। यात्री-पहले नीति और पारदर्शी सूचना-प्रणाली की कमी से लोगों में बेबसी और तनाव बढ़ा। इस स्थिति से सीख मिलती है कि एयरलाइंस को अधिक प्रशिक्षित क्रू, बेहतर रोस्टरिंग तकनीक, मजबूत बैकअप स्टाफ, और संकट के लिए पूर्व-योजना जरूर रखनी चाहिए। नियामकों को भी ऐसे नियम लागू करते समय एयरलाइंस की तैयारियों, मौसमी यात्री दबाव और आवश्यक मानव संसाधन का ध्यान रखना चाहिए, ताकि यात्रियों को ऐसी व्यापक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

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