१. घटनाओं और विषयों से संबंधित समाचार:
समाचार में जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग जमात-उल-मोमिनात से जुड़े बड़े खुलासे पर चर्चा की गई है। मसूद अजहर के हालिया सोशल मीडिया पोस्ट में बताया गया है कि इस महिला विंग में 5,000 से अधिक महिलाओं की भर्ती की गई है, जिन्हें फिदायीन (आत्मघाती) हमलावर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित जैश के केंद्रों में इस भर्ती अभियान को व्यापक रूप से चलाया जा रहा है, जिसकी कमान मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर और अफीरा संभाल रही हैं। इसके तहत महिलाओं को ऑनलाइन जिहादी कोर्स, धार्मिक शिक्षा और कट्टरपंथी विचारधारा देकर आतंकवादी गतिविधियों के लिए तैयार किया जा रहा है।
२. घटनाओं और विषयों के कारण:
यह पूरा अभियान पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद की बढ़ती कट्टरपंथी गतिविधियों और संगठन के नए रणनीतिक बदलावों का परिणाम है। आतंकवादी संगठन अब महिलाओं को ‘धार्मिक कर्तव्य’ और ‘जन्नत के वादे’ जैसी भावनात्मक बातों से ब्रेनवॉश कर रहा है। मसूद अजहर महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण कोर्स—दौरा-ए-तस्किया और दौरा-आयत-उल-निसा—के तहत आतंकी मिशन के लिए तैयार करने की योजना बना रहा है। पाकिस्तान की दोहरी नीति, जहाँ वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर FATF अनुपालन का दावा करता है, वहीं अंदरूनी तौर पर इन संगठनों को बढ़ावा मिलना इस खतरे को और गंभीर बनाता है। पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड उमर फारूक की पत्नी अफीरा और अजहर परिवार की महिलाएँ इस indoctrination प्रक्रिया का नेतृत्व कर रही हैं।
३. घटनाओं और विषयों से सीखे जाने वाले सबक:
इस घटना से स्पष्ट होता है कि आतंकी संगठन अब महिला कट्टरपंथ को नया हथियार बना रहे हैं, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। समाज, सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों को यह समझना होगा कि आतंकवाद केवल हथियारों से नहीं, बल्कि वैचारिक जहर और भावनात्मक शोषण से फैलता है। महिलाओं और युवाओं को ऑनलाइन उग्रवाद से बचाने के लिए मजबूत साइबर मॉनिटरिंग, जागरूकता अभियान और शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान पर अधिक दृढ़ कूटनीतिक दबाव बनाकर ऐसे संगठनों की फंडिंग, भर्ती और प्रचार गतिविधियों पर रोक लगानी होगी।













