तुर्की का ऐसा ‘मानवरहित लड़ाकू विमान’ जिससे एफ़-16 को निशाना बनाने का किया जा रहा दावा

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१. घटनाओं और विषयों से संबंधित समाचार:

तुर्की के पहले मानवरहित लड़ाकू विमान ‘बायरकतार किज़िलेल्मा’ ने परीक्षण के दौरान एक एफ-16 लड़ाकू विमान को बीवीआर (बियॉन्ड विज़ुअल रेंज) मिसाइल से वर्चुअल निशाना बनाने का दावा किया, जिसे रक्षा उद्योग में ऐतिहासिक सफलता बताया जा रहा है। परीक्षण में तुर्की वायुसेना के एफ-16 विमानों ने भी हिस्सा लिया। किज़िलेल्मा ने 50 किमी दूर लक्ष्य को रडार से ट्रैक कर मिसाइल लॉन्च का सफल सिमुलेशन किया। इसे 2026 तक तुर्की सेना में शामिल किए जाने की तैयारी है और इसे समुद्री जहाजों से उड़ान भरने योग्य, रडार से कम दिखाई देने वाला और उन्नत सेंसरों से लैस बनाया गया है।


२. घटनाओं और विषयों के कारण:

तुर्की ने ड्रोन और मानवरहित लड़ाकू विमानों में भारी निवेश इसलिए बढ़ाया क्योंकि पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका, द्वारा हथियारों की बिक्री पर पाबंदियों के बाद उसे स्वदेशी रक्षा उद्योग को मजबूत करना आवश्यक लगा। क्षेत्रीय तनाव, एजियन और पूर्वी भूमध्य सागर में हवाई निगरानी की जरूरत, तथा आधुनिक युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका इसके प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा तुर्की, पाकिस्तान और अन्य देशों के साथ रक्षा सहयोग भी बढ़ा रहा है। स्थानीय रडार, मिसाइल और तकनीक निर्माण क्षमता विकसित करना तुर्की का रणनीतिक उद्देश्य है ताकि वह विदेशी निर्भरता से मुक्त होकर भविष्य के ‘कोलैबोरेटिव कॉम्बैट सिस्टम’ में अग्रणी बन सके।


३. घटनाओं और विषयों से सीखे जाने वाले सबक:

यह घटना दिखाती है कि आधुनिक युद्ध तेजी से मानवरहित और तकनीक आधारित होता जा रहा है। बीवीआर क्षमता वाले ड्रोन दुश्मन के पायलटों को जोखिम में डाले बिना बड़े क्षेत्र में प्रभावी कार्रवाई कर सकते हैं। इससे यह भी सीख मिलती है कि रक्षा आत्मनिर्भरता, अनुसंधान और उच्च तकनीक का विकास किसी भी देश के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा का आधार है। तुर्की का उदाहरण बताता है कि निरंतर निवेश और इनोवेशन से कोई भी देश उन्नत सैन्य तकनीक का वैश्विक खिलाड़ी बन सकता है। भविष्य के युद्धों में ड्रोन, एआई और रिमोट-कंट्रोल्ड प्लेटफॉर्म निर्णायक भूमिका निभाएंगे, इसलिए देशों को इन तकनीकों में समय रहते निवेश करना आवश्यक है।

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