‘विकसित भारत- जी राम जी’ बिल बना क़ानून, मनरेगा से कितना अलग और विपक्ष क्यों है इसे लेकर हमलावर

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१. घटनाओं और विषयों से संबंधित समाचार:
संसद ने ‘विकसित भारत-जी राम जी’ बिल 2025 पारित किया, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंजूरी दे दी। यह नई योजना मनरेगा की जगह लेगी और ग्रामीण इलाक़ों में 125 दिन गारंटीड रोज़गार मुहैया कराएगी। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण विकास और आजीविका सुनिश्चित होगी। विपक्ष ने इसे केंद्र सरकार का अधिनायकवाद बताते हुए विरोध किया, साथ ही मनरेगा हटाने को महात्मा गांधी के सम्मान के खिलाफ बताया।


२. घटनाओं और विषयों के कारण:
इस बिल का कारण मनरेगा की सीमाओं और प्रभावशीलता में सुधार करना है। मनरेगा में सालाना 100 दिन रोजगार की गारंटी थी, जबकि नए बिल में 125 दिन, बेहतर जल और बुनियादी ढांचा, तथा ग्रामीण कनेक्टिविटी पर ध्यान दिया गया है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र को अधिक अधिकार दिए गए हैं और राज्यों का खर्च बढ़ेगा। सरकार इसे ग्रामीण विकास, पारदर्शिता और किसानों-मजदूरों के लाभ के लिए आवश्यक मानती है।


३. घटनाओं और विषयों से सीखे जाने वाले सबक:
इस घटना से यह सीख मिलती है कि ग्रामीण विकास और रोजगार सुनिश्चित करने के लिए योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और संतुलन जरूरी है। केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारों और जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण जरूरी है। राजनीतिक विरोध और संचार की कमी विवाद पैदा कर सकती है। भविष्य में योजनाओं को व्यापक चर्चा, गहन समीक्षा और सभी हितधारकों की भागीदारी से लागू करना चाहिए ताकि विवाद और सामाजिक असंतोष को कम किया जा सके।

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