१. घटनाओं और विषयों से संबंधित समाचार:
भारत ने पिछले दशक में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। यह देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक बन गया है। बड़े सौर पार्कों और लाखों रूफ़टॉप सिस्टमों से बिजली उत्पादन बढ़ा है। सब्सिडी योजनाओं के तहत लगभग 24 लाख घरों में सौर पैनल लगे हैं। सौर ऊर्जा अब कुल ऊर्जा उत्पादन में 20 प्रतिशत से अधिक योगदान दे रही है, जिससे कोयले पर निर्भरता कम हुई है।
२. घटनाओं और विषयों के कारण:
सौर ऊर्जा विस्तार के साथ यह चुनौती सामने आई कि पुराने पैनलों का कचरा पर्यावरण के लिए खतरा बन सकता है। अधिकांश पैनल 25 साल तक काम करते हैं, उसके बाद रीसाइक्लिंग की आवश्यकता होती है। भारत में अभी कुशल रीसाइक्लिंग केंद्र कम हैं और बजट अपर्याप्त है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2047 तक 1.1 करोड़ टन से अधिक सौर कचरा पैदा हो सकता है, जिसे सुरक्षित रूप से ठिकाने लगाने के लिए बड़े निवेश की जरूरत होगी।
३. घटनाओं और विषयों से सीखे जाने वाले सबक:
सौर ऊर्जा की सफलता के साथ रीसाइक्लिंग और कचरा प्रबंधन पर ध्यान देना अनिवार्य है। यदि पैनलों का सुरक्षित निपटान और पुनःप्रोसेसिंग नहीं होगी, तो भविष्य में पर्यावरण संकट बढ़ सकता है। कुशल रीसाइक्लिंग से मूल्यवान धातुएं और सामग्री दोबारा उपयोग की जा सकती हैं, साथ ही कार्बन उत्सर्जन कम होगा। इसके लिए नियमित, आत्मनिर्भर रीसाइक्लिंग व्यवस्था और जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। कंपनियों को जिम्मेदारी निभानी होगी।













