पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन्स के कर्मचारी कनाडा जाकर क्यों हो रहे हैं ‘ग़ायब’

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(१) घटनाओं और विषयों से संबंधित समाचार:
पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) के कर्मचारियों के कनाडा में बार-बार ‘ग़ायब’ होने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में टोरंटो से लाहौर जाने वाली फ्लाइट PK-798 के फ्लाइट अटेंडेंट आसिफ़ नजाम समय पर एयरपोर्ट नहीं पहुंचे और बाद में ‘खराब स्वास्थ्य’ का बहाना देकर वापस लौटने से बचते हुए ‘लापता’ माने गए। यह कोई पहली घटना नहीं है—पिछले कुछ वर्षों में कई फ्लाइट अटेंडेंट और एयर होस्टेस कनाडा पहुंचकर वापस लौटने के बजाय वहीं ‘ग़ायब’ हो गए हैं। इन मामलों में जिब्रान बलूच, मरियम रज़ा और फ़ैज़ा मुख्तार जैसी घटनाओं का भी उल्लेख मिलता है। PIA प्रवक्ता का कहना है कि ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं और एयरलाइन इसकी जांच कर रही है तथा संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू है।


(२) घटनाओं और विषयों के कारण:
कनाडा में PIA कर्मचारियों के ‘ग़ायब’ होने के पीछे मुख्य कारण पाकिस्तान की खराब आर्थिक स्थिति, PIA के निजीकरण की आशंका, नौकरी असुरक्षा और कनाडा के उदार शरणार्थी कानून बताए जाते हैं। कनाडा में शरण मांगने की प्रक्रिया आसान है—क्रू मेंबर्स को वीज़ा की आवश्यकता भी नहीं होती, वे ‘जनरल डिक्लेरेशन’ से प्रवेश कर लेते हैं। वहाँ का रिफ्यूजी कानून आवेदनकर्ता को शक की नज़र से नहीं देखता, जिससे उन्हें शरण मिलने की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं। मजबूत नेटवर्क, एजेंटों का सहयोग और पाकिस्तान के मुकाबले बेहतर जीवन की उम्मीद भी इस प्रवृत्ति को बढ़ाती है। PIA द्वारा पासपोर्ट जमा कराने, युवा कर्मचारियों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से रोकने और बॉन्ड लेने जैसे कदम भी प्रभावी नहीं रहे।


(३) घटनाओं और विषयों से सीखे जाने वाले सबक:
इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि किसी भी संस्था में कर्मचारियों की स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा वे जोखिम उठाने को मजबूरी समझ सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और कानूनों की पारदर्शिता भी ज़रूरी है ताकि किसी देश के कानूनों का दुरुपयोग न हो सके। एयरलाइंस को क्रू मेंबर नीति, निगरानी व्यवस्था और कर्मचारी कल्याण को सुधारना चाहिए, जबकि कनाडा और पाकिस्तान दोनों को मिलकर ऐसा समाधान खोजने की ज़रूरत है जो वास्तविक शरणार्थियों के अधिकारों को सुरक्षित रखे और फर्जी दावों पर रोक लगाए। इन मामलों से यह सीख भी मिलती है कि बेहतर रोजगार, आर्थिक स्थिरता और मजबूत संस्थागत व्यवस्था लोगों को अवैध रास्ते अपनाने से रोक सकती है।

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